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भारत : सभी चार लेबर कोड्स को पूरी तरह से लागू कर दिया

उज्जैन टाइम्स ब्यूरो
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भारत ने अब सभी चार लेबर कोड्स को पूरी तरह से लागू कर दिया है, जिसके लिए आधिकारिक गजट में अंतिम नियम अधिसूचित किए गए हैं। ये सुधार 29 पुराने श्रम कानूनों को 4 सुव्यवस्थित कोड्स में मिलाते हैं

ये चार कोड्स हैं:

1. वेतन संहिता, 2019

2. औद्योगिक संबंध संहिता, 2020

3. सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020

4. व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य-दशा संहिता, 2020

कर्मचारियों के लिए क्या बदलाव हैं?

1. सार्वभौमिक न्यूनतम वेतन

न्यूनतम वेतन के प्रावधान अब विभिन्न क्षेत्रों में अधिक व्यापक रूप से लागू होते हैं, जिसमें कई ऐसे श्रमिक भी शामिल हैं जो पहले औपचारिक सुरक्षा के दायरे से बाहर थे।

2. सामाजिक सुरक्षा का विस्तार

गिग वर्कर्स, प्लेटफॉर्म वर्कर्स और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रावधानों के तहत अधिक व्यापक रूप से शामिल किया गया है।

3. 48 घंटे की साप्ताहिक कार्य सीमा

अधिसूचित नियमों के अनुसार, काम के घंटों की सीमा प्रति सप्ताह 48 घंटे तय की गई है और निर्धारित सीमा से अधिक काम करने पर ओवरटाइम भुगतान अनिवार्य किया गया है।

4. वेतन की मानकीकृत परिभाषा

वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए एक प्रमुख बदलाव "50% वेतन नियम" है जिसके तहत कुल मुआवजे का कम से कम आधा हिस्सा वेतन/मूल वेतन के रूप में वर्गीकृत करना पड़ सकता है। इसके ये प्रभाव हो सकते हैं:

* PF और ग्रेच्युटी योगदान में वृद्धि

* अल्पकालिक 'टेक-होम सैलरी' (हाथ में आने वाले वेतन) में कमी

* दीर्घकालिक सेवानिवृत्ति लाभों में सुधार

5. महिला कार्यबल की भागीदारी

ये सुधार महिलाओं को सुरक्षा उपायों और समान अवसर के प्रावधानों के साथ नाइट शिफ्ट (रात की पाली) में काम करने की अनुमति देते हैं।

 नियोक्ताओं के लिए क्या बदलाव हैं?

 सकारात्मक पहलू

* अनुपालन का सरलीकृत ढांचा

* डिजिटल फाइलिंग और पंजीकरण की सुविधा

* पुराने कानूनों के दोहराव में कमी

* कार्यबल प्रबंधन में अधिक लचीलापन

उठाई गई चिंताएं

ट्रेड यूनियनों का तर्क है कि इन सुधारों के कारण:

* बड़ी कंपनियों के लिए छंटनी करना आसान हो सकता है

* सामूहिक सौदेबाजी (collective bargaining) कमजोर हो सकती है

* श्रमिकों के हितों की कीमत पर नियोक्ताओं का लचीलापन बढ़ सकता है

 यह क्यों महत्वपूर्ण है?

इसे स्वतंत्रता के बाद से भारत के सबसे बड़े श्रम सुधारों में से एक माना जाता है। सरकार इसे इस तरह पेश करती है:

* मैन्युफैक्चरिंग और "ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस" (व्यापार करने में आसानी) को बढ़ावा

* पुराने औपनिवेशिक-युग के श्रम कानूनों का आधुनिकीकरण

* भारत के वर्कफ़ोर्स को औपचारिक बनाने की दिशा में एक कदम

 

साथ ही, मज़दूर यूनियन कई प्रावधानों का विरोध जारी रखे हुए हैं, खासकर औद्योगिक संबंधों और छंटनी के नियमों से जुड़े प्रावधानों का।


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[1]:https://www.moneycontrol.com/news/business/labour-reforms-govt-fully-operationalises-four-new-codes-by-publishing-rules-13913763.html?utm_source=chatgpt.com "श्रम सुधार: सरकार ने नियम प्रकाशित करके चार नए कोड पूरी तरह लागू किए"

[2]:https://www.reuters.com/business/world-at-work/india-announces-implementation-new-codes-reform-labour-laws-2025-11-21/?utm_source=chatgpt.com "भारत ने मज़दूर नियमों में बड़े बदलाव के तहत चार नए श्रम कोड लागू किए"

[3]:https://www.reddit.com/r/IndianFinanceHub/comments/1q7zu71/new_labour_codes_2025_what_every_indian_worker/?utm_source=chatgpt.com "नए श्रम कोड 2025: हर भारतीय मज़दूर को क्या पता होना चाहिए?" [4]: https://timesofindia.indiatimes.com/business/india-business/big-workforce-reform-four-labour-codes-made-effective-to-simplify-and-streamline-labour-laws-check-top-details/articleshow/125483660.cms?utm_source=chatgpt.com "कर्मचारियों के लिए बड़ा सुधार! लेबर कानूनों को आसान और व्यवस्थित बनाने के लिए चार लेबर कोड लागू किए गए - मुख्य बातें यहाँ देखें"

[5]:https://www.business-standard.com/india-news/labour-reforms-get-boost-in-2025-4-codes-to-be-fully-operational-in-2026-125122500178_1.html?utm_source=chatgpt.com "2025 में लेबर सुधारों को मिलेगी तेज़ी, 2026 तक 4 कोड पूरी तरह से लागू हो जाएँगे | India News - Business Standard"

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